शिक्षक

शिष्ट स्वंय हो 

दम रखता हो 
सबको शिष्ट बनाने का
क्षय करता हो 
दानवता का
हद मानवता बिकसाने का
करते रहते कर्म निरंतर
छात्र हित सध जाने का
ऐसे जन जो धरती तल पर
है हक शिक्षक कहलाने का।। 
धन्यवाद डॉ चंद्रमौलि ।




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